अगर बुरा वक़्त चल रहा हैं तो सब्र करो और अगर अच्छा वक़्त चल रहा हैं तो शुक्र करो !!

अगर बुरा वक़्त चल रहा हैं तो सब्र करो और अगर अच्छा वक़्त चल रहा हैं तो शुक्र करो !!

वो कहते हैं न वक़्त भी बड़ी कमाल की बात होती हैं वक़्त गुजरता चला जाता है । अगर बुरा वक़्त चल रहा हैं तो सब्र करो और अगर अच्छा वक़्त चल रहा हैं तो शुक्र करो !!

एक बार की बात हैं एक राजा साहब के पास में बड़ा सुन्दर, विशाल महल था । और उस विशाल से महल में एक सुन्दर सी बगीची थी । उस सुन्दर सी बगीचे में एक माली था और अंगूरों के बेल थी । माली जो था वो इस बात से परेशान था की अंगूरों के बेल पर रोजाना एक चिढ्यां आकर के आक्रमण करती थी । और कुछ उस तरीके से आक्रमण करती थी की जो वो मीठे - मीठे अंगूर थे उन्हें वो खा लेती थी और जो अधपके थे और खट्टे अंगूर थे उनको ज़मीन पर गिरा जाती थी । माली इस बात से बड़ा परेशान चल रहे था की इस अंगूरों के बेल को ये चिढ्यां एक दिन तबाह कर देगी, नष्ट कर देगी । उसने बहुत कोशिश की लेकिन कोई उपाय मिला नहीं तो वो राजा के पास जाकर के पहुँचा ।

राजा साहब को बोला की मालिक, हुकुम आप ही कुछ कीजिए मुझसे हो नहीं पा रहा हैं । अंगूरों की बेल कभी भी ख़त्म हो सकती हैं । राजा ने कहाँ माली साहब अब आप तनाव मत लीजिए आपका काम मैं करुँगी । अगले दिन राजा साहब पहुँचे, खुद अंगूरों की बेल के पीछे जाकर के छुप गए । और जैसे ही चिढ्यां आई राजा साहब ने फ़ुर्ती दिखाकर चिढ्यां को पकड़ लिया । जैसे ही चिढ्यां को पकड़ा चिढ्यां ने राजा को कहाँ - " हे राजन ! मुझे माफ़ कर दो मुझे मत मारों । मैं आपको चार ज्ञान की बातें बताऊंगी । " राजा बहुत गुस्से में थे बोले पहली बात बता । चिढ्यां ने कहाँ आपने हाथ में आएँ शत्रुं को कभी जाने न दें । राजा ने कहाँ दूसरी बात बता ।

चिढ्यां ने कहाँ की कभी भी असम्भव बात पर यक़ीन ना  करें । राजा ने कहाँ बहुत हो गया ड्रामा तीसरी बात बता । चिढ्यां ने कहाँ बीती बातों पर पछतावा ना करें । राजा ने कहाँ अब चौथी बात बता अब खेल ख़त्म करता हूँ बहुत देर से परेशान कर रहां हैं । चिढ्यां ने कहाँ- राजा साहब ! आपने जिस तरीके से मुझे पकड़ा हुआ हैं, मुझे साँस नहीं आ रही हैं । अगर आप मुझे थोड़ा सा छोड़ देंगे, ढील देंगें तो शायद ! मैं आपको चौथी बात बता पाऊँ । राजा ने हलकी - सी ढील दी और चिढ्यां उड़ कर के डाल पर बैठ गईं । चिढ्यां ने कहाँ- राजा साहब ! मेरे पेट में दो हीरे  हैं ये सुनकर के राजा पछतासाप करने लगा और उदास हो गया । राजा की इस शक्ल देखकर के चिढ्यां ने कहाँ - राजा साहब ! अभी मैंने आपको चार ज्ञान की बातें बताईं थी ।

पहली बात बताई थी की कभी अपने शत्रु को हाथ में आने के बाद छोड़े न । आपने हाथ में आए हुए शत्रु को यानि मुझे छोड़ दिया । दूसरी बात बताईं थी - " कभी अशम्भव बात पर यक़ीन ना करें " । आपने यक़ीन कर लिया की मेरे छोटे से पेट में दो हीरे हैं । तीसरी बात बताईं थी की बीती हुई बात पर पछतासाप ना करें । आप उदास हैं , आप पछतासाप कर रहें हैं । जबकि मेरे पेट में हीरे हैं ही नहीं जो हैं ही नहीं उसको सोच कर के आप पछतासाप कर रहें हैं ।

उस चिढ्यां ने चार बातें राजा साहब को ही नहीं हम सब को भी बताईं थी । हम सब भी जो बीत चूका होता हैं कईं बार सोच कर के पछतासाप करते रहतें हैं । हमेशा अतीत की सोचते है और भविष्य के बारे में सोचते ही नहीं हैं ।

वर्तमान में रहना शुरू कीजिए और भविष्य की योजना बनाना शुरू कीजिए अपने सपने को पुरे करने की सोचिए । ज़िन्दगी में जो हो गया उसपे आपका नियंत्रण नहीं हैं लेकिन जो होगा उसको आप बदल सकतें हैं !!

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