Panipat Movie REVIEW | पानीपत मूवी रिव्यु इन हिंदी 

Panipat Movie REVIEW | पानीपत मूवी रिव्यु इन हिंदी 

Panipat Movie REVIEW | पानीपत मूवी रिव्यु इन हिंदी 

RATING : - 2/5

Nepotism एक ऐसी बीमारी है जो हमारे इंडियन सिनेमा को खोकला बना रही है, कुछ ऐसे एक्टर है जो अपनी परिवार का सहारा लेकर फिल्मो में आसानी से घुस जाते है और अच्छी खासी फिल्म को आग लगा देते है इस कड़ी में सबसे ऊपर नाम है अर्जुन कपूर जिनको लोग उनके नकली एक्टिंग या कहूँ ओवर एक्टिंग के चक्कर में काफी भला बुरा सुना देते है। चाहे फिल्म कैसे भी हो चाहे वो हो कॉमेडी, एक्शन या रोमांटिक पर अर्जुन जी के एक्सप्रेशन सदाबहार ही रहता हैं। दुनिया इधर उधर क्यों न हो जाये पर अर्जुन बदलने वाले नहीं है। पर हमने जब से पानीपत देखि है तो हमारे दिमाग में एक ही शब्द आता है, आप खुद ही समझ जाये तो बेहतर है। हेलो फ्रेंड्स आपका फिर से स्वागत है हमारे फ़िल्मी रिव्यु में और आज हम इस हफ्ते की एक फिल्म पर रिव्यु देने  जा रहे हैं - पानीपत का। 

रिव्यु 

जब भी ऐतिहासिक फिल्म पर कहानी पर बात होती है तो स से बड़ा डर यही होता है की फिल्म में असलियत के साथ छेद-छाड़ न बिलकुल भी न हो जाये और फिल्म सिर्फ एक कहानी बनकर न रह जाये। पर फिल्म में अर्जुन ने मराठा की इतनी घटिया एक्टिंग करी है की आप छेद छाड़ तो भूल जाएये, उन्होंने मराठा शब्द का एक नया मतलब ही बना दिया है। जो वीर योद्धा ने पानीपत की लड़ाई में लड़े थे वो आज भटक रही है और अर्जुन कपूर का एड्रेस ढूंढ रहे है। जब फिल्म का कांसेप्ट इतना जबरजस्त है और और इसे पब्लिक में उतारने के लिए इतने जबरजस्त डायरेक्टर भी है पर ऐसा क्या होगया की पानीपत एक दमदार फिल्म होने की जगह सिर्फ एक डब्बा बन कर रह गया। 

कहानी 

फिल्म की कहानी पानीपत के तीसरे युद्ध पर बनी हैं जिसमें वीर मराठा योद्धा अफगानियों से युद्ध कर रहे हैं। आपको बाता दू की इस युद्ध में इतनी मोते हुई थी की इसको इतिहास की सबसे खतरनाक युद्ध में से एक देखा जाता हैं। चौकाने वाली बात यह हैं की अफगानियों का साथ कुछ हिन्दू राजा ने भी दिया था जो की मराठाओ से बहुत ही ज्यादा जलते थे और उन्हें निचा दिखाना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने मराठाओ को देखा दे दिया था। और यह बात हमें फिल्म के पोस्टर में भी दिखाई देती हैं। 

फिल्म में अर्जुन कपूर सदा शिव राव के रोल में दिख रहे हैं, जिसने पानीपथ के युद्ध में मराठाओ को लीड किया था और बहादुरी की बहुत बड़ी मिसाल दिया था। कुछ ऐसे किस्से जिनको सुनकर रोंगते खड़े हो जाता हैं। फिल्म में संजय दत्त एक खलनायक के रोल प्ले करने वाले हैं अगर तीन मिनट के ट्रेलर कुछ अच्छा हैं तो संजय दत्त ही हैं संजय दत्त का लुक हमें पदमवात के खिलजी की याद दिला देता हैं। देखो फिल्म में सब कुछ एक दम परफेक्ट हैं। 

कहानी के दो लीड एक्टर्स है एक है मराठा योद्धा सदा शिव राव जो की अपनी हिम्मत और वीरता के लिए बहुत मशहूर थे और अपने दिमाग से बड़ी बड़ी लड़ाइयों को जीत लिया करते थे। सामने दुसमन कितना बड़ा क्यों न हो पर सदा शिव उसे गुदने टेकने की लिए मजबूर कर दिया करते थे। 

दूसरी तरफ अफगानियों के राजा अहमद शाह अब्दाली है जो की मार काट करने में इनका नाम काफी था और इनके नाम से दुश्मन कापने लगते थे और इनको मार काट करके खून बहाने में काफी मजा आता था। अब इन दोनों में ऐसा क्या हुआ की इनदोनो में लड़ाईया हुई और बहुत सरे लोगो को अपनी जान गवानी पड़ी। कौन किसपर भरी पड़ा यह देखनी वाली बात है। इन सब सवालो का जवाब देने का काम करती है फिल्म पानीपत। 

देखो सच-सच क्या है की फिल्म का कोई अपना वजूद नहीं है इससे पहले फिल्म रिलीज़ हुई  फिल्म बाजिराव मस्तानी और पद्मावत की नक़ल उतरी गई है। पदमतवत से रोमांस तो बाजीराव से रणवीर सिंह का लुक। तो फिल्म में नया क्या है? तो जवाब है कुछ भी नहीं हाँ बस फर्क इतना है की उन फिल्म में आप फिल्म को फील कर सकते हो और  इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है। फिल्म में जोश बिलकुल भी नहीं है जो की हिस्टोरिक फिल्म में नीड पड़ती है और रोंगते खड़े करने वाले डायलाग सिर्फ मजाक बन कर रह जाते है। हार जीत वाले माहौल केवल नाच-गाने में बदल जाते है और अर्जुन कपूर सदा शिव के करैक्टर को सुनील शेट्टी के सस्ते फोटोकॉपी में बदल कर रख देते है। अब आप ही सोच लो की अगर कोई हीरो की वजह कोई नेगेटिव करैक्टर प्ले कर रहे है और पूरा ध्यान अपनी ओर खींच लेता है तो गलती किसकी है। 

फिल्म का नाम पानी पात जरूर है पर आपकी तीन घंटो की लम्बी फिल्म में केवल आपको ढेड़ घाटों का फर्स्ट हाफ केवल अर्जुन और कृति के रोमांस के लिए खर्च कर दिया जाता है, अफगानी और मराठा क्या कर रहे है किसी को कोई जानकारी नहीं है। और बीच में फालतू फालतू के गाने डाल दिए जाते है। और जब वो फिल्म में तलवारबाज़ी करते है तो लगता है की अखाडा लड़ रहे है। फिल्म में कृति सानों की भी एक्टिंग बिलकुल नहीं सही है किसी ने अच्छा रोल किया है तो वो है संजय दत्त और मंत्रा। 

तो देखा जाये तो पानीपत बिलकुल भी स्पेशल फिल्म नहीं है और न तो यह हिस्टोरिक है और न तो मसालेदार यह दोनों के बीच फसकर रह जाती है।

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