छठ पर्व क्यों मनाया जाता है, जानिए इसका इतिहास कैसे हुई इसकी शुरुआत,

छठ पर्व क्यों मनाया जाता है,  जानिए इसका इतिहास कैसे हुई इसकी शुरुआत,

छठ पर्व क्यों मनाया जाता है

छठ पूजा क्यूँ मानते हैं आइए जानते हैं इस ब्लॉग के मदद से  छठ पर्व पूजा कैसे मानते हैं यह पूजा  उत्तर प्रदेश और बिहार के पूर्वांचल क्षेत्र में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। और कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाये जाने वाले इस हिंदू पर्व में भगवान सूर्य और छठी मैया की विधि-पूर्वक पूजा होती है। लेकिन अब सवाल ये उठता है कि छठ पर्व की शुरुआत हुई कैसे।

छठ पूजा से जुड़ी एक अन्य कथा के अनुसार द्वापर युग में जब पांडवों को 12 वर्षो का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास प्राप्त हुए था तो पांडवो की पत्नी द्रौपदी ने भी छठ पूजा का व्रत किया था। कहते हैं सूर्य देव के आशीर्वाद से पांडवो को साहस और तेज प्राप्त हुआ जिससे की उन्होंने महाभारत के युद्ध में विजय प्राप्त की।

छठ महापर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। क्योंकि सूर्य पूजा की शुरुआत सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण के द्वारा हुई थी। कहा जाता है कि कर्ण प्रतिदिन सूर्य देव की पूजा करते थे। वह हर दिन घंटों तक कमर जितने पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया करते थे। कहते हैं कर्ण के महान योद्धा बनने के पीछे सूर्य देव की ही कृपा थी। आज के समय में भी महिलाएं पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं।

छठ की कहानी 

????️ राजा प्रियंवद को संतान प्राप्ति की इच्छा थी।???? उन्होंने महर्षि कश्यप से सहायता मांगी। ???? महर्षि कश्यप ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। ⚰️ दुर्भाग्य से प्राप्त हुआ बच्चा मृत था। ???? भगवान की मानस कन्या देवसेना ने प्रकट होकर सहायता की।???? राजा ने षष्ठी व्रत किया और पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।

Chhath Puja History -

(बिहार में छठ पूजा क्यों मनाया जाता है) प्राचीन कल से ही मनाया जा रहा हैं ये पूजा ऐसा माना हैं ये व्रत जो महिला करती हैं वो हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है  और घर-परिवार में खुशहाली बनी रहती है। छठ व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना से रखती हैं। और सूर्य देव और छठी मैया की अराधना की जाती है। भारत में यहाँ पहला व्रत हैं जो चढ़ते सूरज की जगह डूबते सूरज की पूजा होती है। ये पर्व मुख्य रूप से बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड में मनाया जाता है।

छठ पर्व से जुड़ी एक पौराणिक लोक कथा के अनुसार जब भगवान श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या वापस लौटे तो कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन ही राम राज्य की स्थापना हो रही थी, उस दिन भगवान राम और माता सीता ने व्रत रखा और सूर्य देव की आराधना की। कहत हैं सप्तमी के दिन सूर्योदय के समय उन्होंने पुनः अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था। ऐसा माना जाता है, कि तब से लेकर आज तक छठ पर्व के दौरान ये परंपरा चली आ रही है।
 

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