हर्निया,कारण,लक्षण,जांच,कैसे होते हैं | हर्निया क्या हैं।

हर्निया,कारण,लक्षण,जांच,कैसे होते हैं | हर्निया क्या हैं।

हर्निया,कारण,लक्षण,जांच,कैसे होते हैं हर्निया क्या हैं।

1.पेट में सूजन का कारण (cause of stomach bloating)

स्वास्थ रहने के लिए क्या क्या खाना है इस बात पर ध्यान देने के बजाय क्या क्या नहीं खाना है इसपर ज्यादा ध्यान देनी चाहिए। फास्ट फूड और सड़क किनारे बिक रहे अस्वस्थ्य फूड्स को रोजाना खाने की वजह से हमारी पाचन शक्ति खराब हो जाती है, खाना समय पर हजम नहीं होता है और पेट में हमेशा गैस और कब्ज की समस्या बनी रहती है। इतना ही नहीं लाइफ की रफ्तार तेज होने और टेंशन होने पर हम सिगरेट का भी सेवन करते हैं।

अपने खान पान और हेल्थ पर ध्यान ना देने की वजह से आज हम ना जाने कितनी बीमारियों से घिरे हुए हैं। बेकार चीजों (Unhealthy Foods) को खाने और सिगरेट पीने से पेट में गैस और सूजन की समस्या शुरू होती है। बहुत सी गंभीर बीमारियों की शुरुआत पेट से ही होती है। इसलिए बिना देरी किए आपको अपने पेट में हो रहे सूजन की अच्छे से जांच करानी चाहिए और इसके कारणों को का पता भी लगाना चाहिए। क्योंकि

हर्निया मुख्य रूप से इन 6 कारणों से हो सकती हैं,जो इस प्रकार हैं

  1. पेट की मांसपेशियों का कमजोर होना- जब किसी व्यक्ति के पेट की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, तो वे हर्निया का कारण बन सकती हैं।

  2. लंबे समय से खांसी का होना- यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक खांसी रहती है तो उसे जल्द-से-जल्दी इसकी जांच करानी चाहिए क्योंकि यह हर्निया का संकेत हो सकता है।

  3. अधिक वजन होना- जिस व्यक्ति का अधिक वजन होता है, उसे हर्निया होने की संभावना अधिक रहती है। इसीलिए उसे वजन को कम करने की कोशिश करनी चाहिए।

    यदि उसे तमाम कोशिशे करने के बावजूद इस समस्या से राहत नहीं मिल रही है, तो उसके लिए बेरियाट्रिक सर्जरी या लिपोसक्शन सर्जरी उपयोगी साबित हो सकती हैं।

  4. उम्र का अधिक होना- जिस व्यक्ति की उम्र 60 साल से अधिक होती है, उसे हर्निया होने की अधिक संभावना रहती है क्योंकि इस अवस्था में उसके शरीर की मांसपेशियां काफी कमजोर हो जाती हैं और वे उभर जाती हैं।

  5. किसी बीमारी का होना- यदि आपको कोई बीमारी जैसे किडनी या लिवर की बीमारी है तो आपको हर्निया की समस्या हो सकती है।

    इसलिए आपको समय रहते किडनी डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट करा लेना चाहिए ताकि आप इस समस्या से बच सकें।

  6. कब्ज का होना- जिस व्यक्ति को कब्ज की शिकायत रहती है, उसे यह समस्या हो सकती है।

आपके पेट में हो रहे सूजन का कारण हर्निया भी हो सकता है। आमतौर पर ऐसा देखा गया है की पेट के सूजन का कारण कोई और बीमारी नहीं बल्कि हर्निया ही होता है।

2.हर्निया क्या है (what is hernia)

हर्निया एक शारीरिक गंभीर बीमारी है। अगर समय पर इसका इलाज नहीं हुआ तो यह दूसरी अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है। हर्निया की स्थिति में इंसान के शरीर का कोई हिंसा या अंग अपने सामान्य आकार से ज्यादा बड़ा हो जाता है। यह बीमारी शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है लेकिन ज्यादातर मामलों में हर्निया की समस्या इंसान के पेट में देखने को मिलती है। पेट की मांसपेशियों के खराब होने की वजह से आंत का आकार जरूरत से ज्यादा बढ़कर बाहर निकल आता है जिसके कारण पेट में हर्निया की समस्या शुरू हो जाती है। 

बहुत कम ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें हर्निया बिना इलाज के अपने आप ही ठीक हो गया है। लगभग सभी मामलों में हर्निया का समय पर सही इलाज कराना चाहिए। अगर सही समय इलाज नहीं हुआ तो यह मरीज के मौत का कारण भी बन सकता है। अगर आप अपने पेट में सूजन या दर्द महसूस करते हैं तो तुरंत डॉक्टर से इसकी जांच कराएं और साथ ही बेहतर इलाज भी। लंबे समय तक इसको नजरअंदाज करना आपको परेशानी में डाल सकता है।

3.पुरुषों में हर्निया के लक्षण कौन-कौन से होते हैं? (Symptoms of Hernia in Hindi)

किसी भी अन्य बीमारी की तरह हर्निया के भी कुछ लक्षण होते हैं, जिन पर समय रहते ध्यान दिया जाए, तो इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।

यदि आपके शरीर में भी ये लक्षण नज़र आ रहे हैं, तो इन्हें नज़रअदाज़ न करें क्योंकि ये पुरुषों में हर्निया के लक्षण हो सकते हैं-

  • पेट पर सूजन होना- हर्निया की शुरूआत पेट पर सूजन के साथ होती है। हालांकि, सूजन पेट के उसी हिस्से पर होती है, जहां की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।

  • पेट का साफ न रहना- पेट का साफ न रहना हर्निया का मजबूर संकेत हो सकता है, इसलिए इस लक्षण को ठीक करने की कोशिश की जानी चाहिए।

  • मल में खून आना- हर्निया होने पर कई बार मल में खून भी आता है। ऐसे में व्यक्ति को डॉक्टर से तुरंत मिलना चाहिए और हर्निया की जांच करानी चाहिए।

  • सीने में दर्द होना- इस समस्या के होने पर कई लोगों में सीने में दर्द होता है। इसलिए समझदारी इसी में है कि इस लक्षण को गंभीरता से लिया जाए तो इसकी जांच कराई जाए।

  • पेट के ऊपरी भाग में दर्द होना- यदि किसी व्यक्ति के पेट के ऊपरी भाग में दर्द होता है, तो यह उसके लिए हर्निया का संकेत हो सकता है।

  • उल्टी होना- हालांकि, उल्टी को गंभीरता से नहीं लिया जाता है, लेकिन कई बार उल्टी होना भी हर्निया का लक्षण हो सकता है।

    अत: यदि आपको भी यह समस्या है तो इसे नज़रअदाज़ न करें और तुरंत इसकी जांच डॉक्टर से कराएं।

  • चलने या बैठने में तकलीफ होना- इस समस्या के बढ़ जाने पर व्यक्ति को चलने या बैठने में भी तकलीफ होती है।

4.हर्निया की जांच (hernia test)

हर्निया की जांच बहुत ही आसानी की जाती है क्योंकि पेट के जिस क्षेत्र में हर्निया होती है वहां की स्किन बाहर की तरफ थोड़ी सी उभरी हुई दिखाई देती है। इससे डॉक्टर को जांच करने में परेशानी नहीं होती है। जांच की मदद से डॉक्टर हर्निया की बीमारी और इसकी स्थिति को अच्छे से समझ पाते हैं और फिर इसके बेस्ट ट्रिप्टमेन्ट ऑप्शन का चुनाव करते हैं। कई बार हर्निया होने के बाद भी उससे प्रभावित क्षेत्र बाहर की तरफ उभरा हुआ दिखाई नहीं देता है तो इस स्थिति में डॉक्टर मरीज की शारीरिक जांच, पेट का अल्ट्रासाउंड, खून की जान और एमआरआई कराने की सलाह देते हैं ताकि इसे अच्छे से समझ सकें। इन सब के अलावा डॉक्टर मरीज को खड़े होने और खांसने के लिए भी कहते हैं। यह भी हर्निया की जांच का एक तरीका है।

5.हर्निया का इलाज कैसे किया जा सकता है? (Treatment of Hernia in Hindi)

आमतौर पर, हर्निया को एक लाइलाज बीमारी समझा जाता है, लेकिन किसी भी अन्य बीमारी की तरह इसका भी इलाज संभव है, जिसके लिए निम्नलिखित तरीकों को अपनाया जा सकता है-

  1. जीवन शैली में बदलाव करना- हर्निया का इलाज जीवन-शैली में बदलाव जैसे खान-पान में बदलाव करना, वजन को नियंत्रित रखना, मसालेदार भोजन का परहेज करने इत्यादि करके भी किया जा सकता है।

  2. होम्योपैथिक इलाज कराना- होम्योपैथी ने काफी तेज़ी से प्रसिद्धि प्राप्त की है, इसी कारण लोग इसे अपना भी रहे हैं।

    यदि किसी व्यक्ति को हर्निया की समस्या है, तो वह होम्योपैथिक इलाज करा सकता है। यह उसके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

  3. अल्ट्रासाउंट कराना- जब कोई व्यक्ति हर्निया की समस्या को लेकर किसी डॉक्टर के पास जाता है, तो डॉक्टर सबसे पहले उसके पेट का अल्ट्रासाउंट करते हैं ताकि इस समस्या की स्थिति का पता लगाया जा सके।

  4. एक्स-रे कराना- कई बार डॉक्टर एक्स-रे के द्वारा भी हर्निया का इलाज करते हैं।

  5. सर्जरी कराना- जब हर्निया का इलाज अन्य तरीकों से नहीं हो पाता है, तब सर्जरी का सहारा लिया जाता है।

    ऐसी स्थिति में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी को कराया जाता है, जो हर्निया का सफल इलाज करती है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी को साधारण भाषा में दूरबीन सर्जरी भी कहा जाता है। इस सर्जरी में मुख्य रूप से एक टेलीस्कोप को वीडियो कैमरा के साथ जोड़ा जाता है। इस टेलीस्कोप को छोटे चीरे के द्वारा (जो कि नाभि के नीचे बनाया जाता है) पेट में डाला जाता है एवं संपूर्ण पेट की सूक्ष्मता से जाँच की जाती है।

6.हर्निया सर्जरी को कैसे किया जाता है? (Procedure of Hernia Surgery in Hindi)

जब कोई डॉक्टर किसी व्यक्ति को हर्निया सर्जरी कराने की सलाह देेतें हैं तो उसके मन में सबसे पहला प्रश्न यही आता है कि हर्निया सर्जरी को कैसे किया जाता है।

तो आइए, हर्निया सर्जरी की प्रक्रिया के बारे में जानते हैं, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण स्टेप शामिल होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  • स्टेप 1: व्यक्ति को पीठ के बल लेटाना- हर्निया ऑपरेशन की शुरूआत व्यक्ति को पीठ के बल लेटाकर होती है।

  • स्टेप 2: व्यक्ति को एनेस्थीसिया देना-  इसके बाद उसे एनेस्थीसिया दिया जाता है, ताकि उसे इस दौरान किसी प्रकार का दर्द महसूस न हो।

  • स्टेप 3: लेप्रोस्कोपी मॉनिटर को लगाना- व्यक्ति को एनेस्थीसिया देने के बाद डॉक्टर लेप्रोस्कोपी मॉनिटर को लगाते हैं ताकि इस ऑपरेशन के दौरान होने वाली गतिविधों पर नज़र रखी जा सके।

  • स्टेप 4: त्वचा में कट को लगाना – इसके बाद डॉक्टर व्यक्ति के शरीर के उस हिस्से पर कट लगाते हैं, जहां पर हर्निया की समस्या होती है।

  • स्टेप 5: पतले स्कोप को डालना- कट लगाने के बाद डॉक्टर उसके शरीर में पतली, हल्की दूरबीन (Scope) को डालते हैं ताकि शरीर की आंतरिक गतिविधियों को देखा जा सके।

  • स्टेप 6: हर्निया का इलाज करना- इस सर्जरी के अंत में हर्निया का इलाज किया जाता है, जिसके लिए डॉक्टर एक पतली ट्यूब का इस्तेमाल करते हैं।

7.हर्निया के नुकसान कौन-कौन से हो सकते हैं? (Side-Effects of Hernia Surgery in Hindi)

हालांकि, हर्निया का सफल इलाज हर्निया की सर्जरी के द्वारा किया जा सकता है, लेकिन इसके कुछ जोखिम भी हो सकते हैं, जिनके बारे में जानना महत्वपूर्ण है।

  1. आंतों में दर्द होना– कई बार हर्निया की सर्जरी कराने के बाद व्यक्ति की आंतों (intestine) में दर्द होता है।

  2. रक्तस्राव होना- इस सर्जरी के बाद रक्तस्राव होना एक अन्य जोखिम है।

  3. संक्रमण होना- कुछ लोगों में इस सर्जरी के बाद संक्रमण भी हो जाता है।

  4. पेट का खराब रहना- कई बार ऐसा भी देखा गया है कि कुछ लोगों में इस सर्जरी को कराने के बाद भी पेट खराब रहता है और ऐसी स्थिति में उसे इस सर्जरी को फिर से कराने की जरूरत पड़ती है।

  5. दिल की धड़कनों का तेज़ होना- अकसर ऐसा भी होता है कि हर्निया की सर्जरी के बाद व्यक्ति के दिल की धड़कनें काफी तेज़ हो जाती हैं।

8.हर्निया के ऑपरेशन के बाद कौन- कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए? (Precaution in Hernia in Hindi)

हालांकि, हर्निया के ऑपरेशन के कुछ जोखिम भी होते हैं, लेकिन इन सावधानियों को बरतकर इन्हें कम किया जा सकता हैं-

  1. ध्रूमपान न करना- यदि आपने हाल ही में हर्निया सर्जरी को कराया है तो आपको ध्रमूपान नहीं करना चाहिए क्योंकि यह आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।

  2. व्यायाम करना- हर्निया सर्जरी को करने के बाद व्यक्ति को व्यायाम करना चाहिए ताकि उसके शरीर की मांसपेशियां मजबूत हो सकें और वह जल्दी से ठीक हो जाएं।

  3. फाइबर और सब्जियों का सेवन करना- व्यक्ति को अपनी डाइट पर ध्यान देना चाहिए और ऐसे भोजन का सेवन करना चाहिए जो फाइबर युक्त हो।

  4. सर्जरी के घाव को साफ रखना- इस सर्जरी के दौरान कई गए घाव का व्यक्ति को विशेष ध्यान रखना चाहिए और उसे समय-समय पर साफ रखना चाहिए ताकि उसके शरीर में किसी तरह का संक्रमण न हो।

  5. डॉक्टर के संपर्क में रहना- यदि आपने हाल ही में हर्निया की सर्जरी कराई है, तो आपको तब तक डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए जब तक वह आपको पूरी तरह से सेहतमंद घोषित न कर दें।

 

 

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