गिरते हैं सहसवार ही मैदाने जंग में वो तिफ्ल क्या गिरेंगे जो घुटनो के बल चलते हैं ।

गिरते हैं सहसवार ही मैदाने जंग में वो तिफ्ल क्या गिरेंगे जो घुटनो के बल चलते हैं ।

2000 की बात हैं तब मेरिकल ऐप्तन 11 साल की थी । अपने चाचा के साथ में रात के वक़्त में पानी लाने बहार गईं हुईं थी ।  तभी सुनसान इलाके में उनके अंकल पर चार पांच बदमाशो ने तेज धार - धार हथियार से हमला कर दिया । उनके अंकल को जमींन पर गिरने के लिया बोला और उसके बाद में पीटने लगें मारने लगें । छोटी सी बच्ची ये  देख कर के सहम गईं । ये महसूस कर चुकी थी की उसपे भी हमला करेंगें इसिलिए वहां से भागने लगी । छोटी बच्ची कितना दूर भागति । थोड़ी दूर पर इन बदमाशों ने उसे पकड़ लिया । उसे मारने पीटने लगें । वो बचाओ बचाओ चिलाती रही । मेरिकल ऐप्तन जमींन पर गिर कर बेहोस हो चुकी थी । जब होश आया तो देखा आस - पास खून ही खून था । और बदमाश वहीँ खड़े थे । मेरिकल ऐप्तन ने मरे होने का नाटक किया । वो बदमाश वहां से चले गए । उसके बाद ये छोटी सी बच्ची तेजी से अपनी घर की ओर भागने लगी । भागते भागते देखा की दोनों हाथ की हथेलियाँ लटकी हुई हैं । खून ही खून बह रहा था । घर पहुंची माँ को आवाज लगाई । माँ जैसे तैसे बच्ची को लेके तुरंत हॉस्पिटल पहुंची । लेकिन काफी देर हो चुकी थी । चार - पांच घंटे के ऑपरेशन के बाद मेरिकल ऐप्तन को बचा लिया गया लेकिन उनके दोनों हाथ जा चुकें थे । उसके बाद जब ये घर पहुँचे तो परेशानियाँ ख़त्म नहीं हुई । हॉस्पिटल का बिल पे करने के लिए दूर के रिश्तेदारों को बुलाया । बिल पे करा । घर पहुंचे तो देखा की घर जला कर के चले गए थे वो बदमाश । जैसे तैसे ज़िन्दगी की शुरुआत की ।

इतना सब होने के बाद भी मेरिकल ऐप्तन कहती हैं की उन्होंने हार नहीं मानी ऊपर वाले को कुछ नहीं कहाँ बल्कि ऊपर वाले का शुक्रिया किया की ऊपर वाले ने ज़िन्दगी बचा ली । मेरिकल ऐप्तन ने हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की 2008 में । हॉटेल मैनेजमेंट का कोर्स किया । बचपन से खाना बनाने का शौक था इसलिए २०११ में सैफ़ बन गईं । इतनी बड़ी विकलांगता के बाद भी जीने के ज़ज्बे को कम नहीं किया । और मेरिकल लाइफ में आगे बढ़ती गईं । उन्हें मीडिया ने हाईलाइट किया । उनके कार्यकर्म को देख कर के बड़ी बड़ी होटेल्स ने उन्हें प्रोजेक्ट पे आने का मौका दिया । मेरिकल के साथ जो सैफ़ काम करते हैं वो बताते हैं की वो मदद के लिए किसी को तभी बुलाती हैं जब किसी गर्म बर्तन का दक्खन हटाना हो या किसी शीशे का चिकना दक्खन खोलना हो । मेरिकल आज भी बतौर सैफ़ काम कर रहीं हैं । और उनकी ये कहानी हमे ज़िन्दगी में प्रेरित करता हैं ।

उनकी ये कहानी हमे बताती हैं की हम ज़िन्दगी में कई बार छोटी - छोटी मुश्किलों के आगे हार मान लेते हैं । छोटी मोती परेशानियों को अलविदा कहिये और ज़िन्दगी का सामना कीजिये ।

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