दीपावली क्या है और इसे क्यों मनाते है? Why we Celebrate the festivals of Lights Diwali

दीपावली क्या है और इसे क्यों मनाते है? Why we Celebrate the festivals of Lights Diwali

दीपावली क्या है और इसे क्यों मनाते है?

Contents of blog

दिवाली पर निबंध

इतिहास

महत्त्व

दिवाली सही तरीके से कैसे मनाये?

दीपावली मनाने के प्रमुख कारण(जरूर पढ़े)

दिवाली हिंदुस्तान की धरती पर मनाया जाने वाला सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण त्यौहार है. यह पर्व कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है. इस दिन भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास काटकर, वापस अयोध्या पधारे थे. उनके आगमन की ख़ुशी में नगवासियों ने सारे नगर में घी के दीपक जलाये थे और अमावस्या की काली रात भी रोशन हो गयी थी. उनकी याद में आज भी यह त्यौहार बड़े हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है. इसे ज्योति पर्व, प्रकाश उत्सव और दीपावली भी कहा जाता है.

दिवाली दशहरा के 20 दिन बाद अक्टूबर या नवम्बर के महीने में आता है. इस दिन चाहे लोग भगवान राम के आगमन को याद न करते हों, परंतु अपने सगे-सम्बन्धियों के यहाँ आना-जाना नहीं भूलते. हिन्दू जन अपने प्रियजनों के घरों में जाकर मिठाई बाँटते हैं. इस प्रकार यह उत्सव आनंद, मिलन, स्नेह और ख़ुशी का त्यौहार है. दिवाली का त्यौहार बच्चों के मन को बहुत भाता है इसलिए आज मै इस लेख के जरिये दिवाली पर प्रस्तुति(दीपावली क्या है और इससे क्यों मनाते है?) प्रस्तुत कर रही हूँ जिससे सब को दिवाली का इतिहास और महत्व के बारे में जानकारी मिल सके.

दिवाली पर निबंध

दिवाली भारत के सबसे बड़े और प्रतिभाशाली त्यौहार में से एक है. यह त्यौहार अध्यात्मिक रूप से बुराई पर अच्छाई की, अंधकार पर प्रकाश की तथा अज्ञान पर ज्ञान की विजय का त्यौहार है. दीपावली पांच दिनों का एक लम्बा उत्सव है जिसको लोग पुरे आनंद और उत्साह के साथ मनाते हैं. दिवाली के पहले दिन को धनतेरस, दुसरे दिन को छोटा दिवाली, तीसरे दिन को दीपावली या लक्ष्मी पूजा, चौथे दिन को गोवर्धन पूजा तथा पाँचवे दिन को भैया दूज कहते हैं. पुरे भारत में इस पर्व को बड़े धूम धाम से मनाया जाता है. दीयों की जगमगाहट के बिच हर कोई इश्वर से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करता है. पटाखों की आवाज़, मोमबत्ती का प्रकाश यह सब दिवाली की शान है.

दिवाली शब्द दीपावली का लघु रूप है, जिसका शाब्दिक अर्थ है प्रकाश की पंक्ति. यह त्यौहार सारे भारत, नेपाल, सिंगापोर, मलेसिया, श्री लंका, इंडोनेशिया, मारीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद और दक्षिण अफ्रीका में मनाया जाता है. क्या आपको पता है की दुनिया का सबसे बड़ा festival कौन सा है? दिवाली ही एक ऐसा पर्व है जिसे केवल भारत देश में ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में धूम धाम से मनाया जाता है इसलिए दिवाली ही है जो दुनिया का सबसे बड़ा festival है. इस त्यौहार को सभी धर्म के लोग मनाना पसंद करते हैं और सबसे ज्यादा सिख, बौद्ध और जैन धर्म के लोग इस त्यौहार को मनाते हैं. दिवाली अमावस्या के दिन मनाया जाता है. इस दिन भगवान श्री राम सीता माता के साथ 14 वर्षों का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे. उसी खुशी में यह त्यौहार मनाया जाता है.

इतिहास

भारत में प्राचीन काल से दीवाली को हिंदू कैलेंडर के कार्तिक माह में गर्मी की फसल के बाद के एक त्योहार के रूप में दर्शाया गया। दीवाली का पद्म पुराण और स्कन्द पुराण नामक संस्कृत ग्रंथों में उल्लेख मिलता है जो माना जाता है कि पहली सहस्त्राब्दी के दूसरे भाग में किन्हीं केंद्रीय पाठ को विस्तृत कर लिखे गए थे। दीये (दीपक) को स्कन्द पुराण में सूर्य के हिस्सों का प्रतिनिधित्व करने वाला माना गया है, सूर्य जो जीवन के लिए प्रकाश और ऊर्जा का लौकिक दाता है और जो हिन्दू कैलंडर अनुसार कार्तिक माह में अपनी स्तिथि बदलता है। कुछ क्षेत्रों में हिन्दू दीवाली को यम और नचिकेता की कथा के साथ भी जोड़ते हैं। नचिकेता की कथा जो सही बनाम गलत, ज्ञान बनाम अज्ञान, सच्चा धन बनाम क्षणिक धन आदि के बारे में बताती है; पहली सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व उपनिषद में दर्ज़ की गयी है।

7 वीं शताब्दी के संस्कृत नाटक नागनंद में राजा हर्ष ने इसे दीपप्रतिपादुत्सव: कहा है जिसमें दिये जलाये जाते थे और नव दुल्हन और दूल्हे को तोहफे दिए जाते थे। 9 वीं शताब्दी में राजशेखर ने काव्यमीमांसा में इसे दीपमालिका कहा है जिसमें घरों की पुताई की जाती थी और तेल के दीयों से रात में घरों, सड़कों और बाजारों सजाया जाता था। फारसी यात्री और इतिहासकार अल बेरुनी, ने भारत पर अपने 11 वीं सदी के संस्मरण में, दीवाली को कार्तिक महीने में नये चंद्रमा के दिन पर हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला त्यौहार कहा है।

महत्त्व

दीपावली नेपाल और भारत में सबसे सुखद छुट्टियों में से एक है। लोग अपने घरों को साफ कर उन्हें उत्सव के लिए सजाते हैं। नेपालियों के लिए यह त्योहार इसलिए महान है क्योंकि इस दिन से नेपाल संवत में नया वर्ष शुरू होता है।

दीपावली नेपाल और भारत में सबसे बड़े शॉपिंग सीजन में से एक है; इस दौरान लोग कारें और सोने के गहनों के रूप में भी महंगे आइटम तथा स्वयं और अपने परिवारों के लिए कपड़े, उपहार, उपकरणों, रसोई के बर्तन आदि खरीदते हैं। लोगों अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों को उपहार स्वरुप आम तौर पर मिठाइयाँ व सूखे मेवे देते हैं। इस दिन बच्चे अपने माता-पिता और बड़ों से अच्छाई और बुराई या प्रकाश और अंधेरे के बीच लड़ाई के बारे में प्राचीन कहानियों, कथाओं, मिथकों के बारे में सुनते हैं। इस दौरान लड़कियाँ और महिलाऐं खरीदारी के लिए जाती हैं और फर्श, दरवाजे के पास और रास्तों पर रंगोली और अन्य रचनात्मक पैटर्न बनाती हैं। युवा और वयस्क आतिशबाजी और प्रकाश व्यवस्था में एक दूसरे की सहायता करते हैं।

क्षेत्रीय आधार पर प्रथाओं और रीति-रिवाजों में बदलाव पाया जाता है। धन और समृद्धि की देवी - लक्ष्मी या एक से अधिक देवताओं की पूजा की जाती है। दीवाली की रात को, आतिशबाजी आसमान को रोशन कर देती है। बाद में, परिवार के सदस्यों और आमंत्रित दोस्त भोजन और मिठायों के साथ रात को मनाते हैं।

दिवाली सही तरीके से कैसे मनाये?

आपने तो जान ही लिया होगा के दिवाली क्यों मनाया जाता है. चलिए जान लेते है के दिवाली कैसे मनाये. आपको लग रहा होगा के ये तो सबको पता है के दिपाबली कैसे मनाते है पर में आपको सही तरीके से कैसे मनाते है वो बताउंगी. जिससे आप एक खुशाल और सुरक्षित दीपावली का आनंद उठा सके.

1. दिवाली मानाने के लिए अपने घर को अच्छे से साफ़ करें, घर की गन्दगी को हटाये और कूड़ेदान में ही कचरा फेकें न की रोड पर या जमीन पर डालें. घर को साफ़ करने के बाद हम अपने घर को सजाते हैं, बहुत से लोग दिये का इस्तेमाल करते हैं और बहुत से लोग मोमबत्ती का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन दिवाली में अगर अपने घर को रोशन करना है तो दिये का इस्तेमाल करना ही सही तरीका है.

मोमबत्ती को बनाते वक़्त उसमे हानिकारक चीजों का उपयोग होता है और जो रंग बिरंगे मोमबत्ती होती है वो तो ज्यादा खतरनाक होती है क्यूंकि उसमे chemicals मिला हुआ होता है जिसके कारण जब भी मोम्बाती जलाई जाती है तो उससे जहर जैसी पदार्थ बाहार निकलकर आती है जो हमारे वायु को प्रदूषित करती है जो इन्सान, जानवर, पेड़ और वातावरण सभी के लिए हानिकारक होती है. इसलिए दिवाली में मोमबत्ती का इस्तेमाल नहीं करना ही समझदारी का काम है. दिया तो इस भूमि की मिटटी से ही बनायीं गयी होती है तो उसके इस्तेमाल से हमारे वातावरण को कोई हनी नहीं होती.

2. बहुत से घरों में आपने देखा होगा की लोग अपने घर के बाहार दिप जलाने के साथ साथ रंगोली भी बनाते हैं जो दिखने में बहुत ही खुबसूरत होते हैं और जिन्हें देख कर पता ही नहीं चलता की वो भी हमारे लिए हानिकारक हो सकते हैं. हम रंगोली में जो रंग भरते हैं वो रंग क्या natural होते हैं? नहीं होते, उन रंगों को हम कहाँ से लाते हैं? बाज़ार से खरीद कर और बाज़ारों में जो रंग बिकते हैं वो बिलकुल भी natural नहीं होते बल्कि वो रंग chemicals के इस्तेमाल से बनाये गए होते हैं जो हमारे skin के लिए बहुत ही खतरनाक होते हैं क्यूंक हम रंगोली में रंग भरने के लिए अपने हाथों का इस्तेमाल करते हैं.

तो ऐसे में क्या करना चाहिये? अगर हम रंगोली में रंगों की जगह फुल का इस्तेमाल करें जैसे गुलाब, कमल, गेंदा फुल तो वो और भी खुबसूरत लगेगा और साथ ही साथ हमें उससे कोई भी हानी नहीं पहुचेगी. या फिर इसके अलावा हम chemicals रंगों के अलावा naturals रंगों का इस्तेमाल कर सकते हैं.

3. घर के सभी बच्चे दिवाली का बड़े ही बेसब्री से इंतज़ार करते हैं क्यूंकि उस दिन उन्हें बहुत सारे पटाखे जलाने का अवसर मिलता है. बच्चों की खुसी को देख कर हम सबका मन भी प्रसन्न हो जाता है और उनकी पसंद के सारे छोटे बड़े पटाखें हम बाज़ार से खरीद कर ले आते हैं. वो तो बच्चे हैं सही या गलत का फर्क उन्हें कहाँ मालूम रहता है लेकिन हम तो बड़े हैं उनकी सेहत का ख्याल रखने की जिम्मेदारी हमारी होती है.

पटाखों में भी तरह तरह के chemicals का इस्तेमाल कर बारूद बनाये जाते हैं और इन सभी छोटे बड़े पटाखों में डाले जाते हैं. पटाखों के जलने के बाद जो उसमे से धुआं निकलता है वो हमारे आसपास के वातावरण में फ़ैल जाता है और जब भी हम सांस लेते हैं ये सभी चीजें जो हवे में तैर रही होती है वो सीधे हमारी सरीर के अन्दर जाती है और विभिन्न प्रकार की बिमारियों को पैदा करती है. ये धुआं सिर्फ हमारे लिए ही ख़राब नहीं है बल्कि पौधे और जानवरों के लिए भी उतनी ही खतरनाक है. हमारी गलती की सजा उन्हें भी भुगतनी पड़ती है.इसलिए दिवाली में पटाखें का इस्तेमाल ना करें ऐसा मै बिलकुल भी नहीं कह रही, मै बस यही कहना चाहती हूँ की छोटे छोटे पटाखों का इस्तेमाल करें जैसे अनार, चाकरी, झिरझिरी, इन सभी पटाखों से भी प्रदुषण होता है लेकिन बड़े बड़े पटाखों की मात्रा में कम होता है जो की छोटे पटाखों से ज्यादा खतरनाक साबित होते हैं. बड़े पटाखों से बच्चो को दूर रखें और बड़े लोग भी जो इन पटाखों का इस्तेमाल करते हैं वो भी इनसे सावधानी बरतें क्यूंकि इन पटाखों से आपके शरीर पर चोट लगने के ज्यादा आसार होते हैं.

4. अपने ये भी देखा होगा की पटाखे जल जाने के बाद लोग रास्ते पर ही उन पटाखों के छिलकों को छोड़ देते हैं जिससे अगले दिन आप घर के बाहार देखें तो चारो और गन्दगी सी फैली रहती है. गन्दगी सभी मिलकर करते हैं लेकिन उन्हें साफ़ करने कोई आगे नहीं आता. इन गंदगियों को कौन साफ़ करेगा? हमे ही साफ़ करना होगा, जब हम अपने घर के अन्दर गन्दगी नहीं देख सकते तो घर के बहार क्यूँ देखकर छोड़ देते हैं? ये धरती भी तो हमारी माँ है तो उसे साफ़ सुथरा रखना भी हमारा ही कर्तव्य है.

ये थे सुरक्षित दिपावली से जुड़े कुछ जानकारी. अपने कर्तव्यों से पीछे मत हटिये और इस दिवाली को पिछले दिवाली से बहुत ख़ास और बेहतर बनाइये. ऊपर बताये हुए बातों का ध्यान रखे और अपने आस पास के लोगों को सही तरीके से दिवाली मानाने का सिख दें.

दीपावली मनाने के प्रमुख कारण(जरूर पढ़े):-

  • श्री राम के वनवास खत्म करके आयोध्या लौटने पर

यह तो हम सभी जानते हैं कि इसी दिन श्रीराम अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ आयोध्या वापस लौट आए थे। उनके वापस लौटने की खुशी में उनका पूरा राज्य खुशी से भर गया था। उनके लौटने की खुशी में वहां की प्रजा ने घी के दीये जलाए थे, उस दिन से लेकर आज तक हर कोई इस दिन को सेलिब्रेट करता है। 

बता दें, मंथरा के भड़काए जाने के बाद कैकेयी ने दशरथ और कौशिल्या के पुत्र राम को 14 वर्ष के वनवास का वचन मांगा था, राम के साथ उनकी पत्नी सीता और सुमित्रानंदन भाई लक्ष्मण भी वनवास चल दिए। वहां पर रावण द्वारा सीता का अपहरण हो जाता है। बाद में सुग्रीव और हनुमान की मदद से भगवान राम सीता को वापस पाते हैं और उनके साथ वापस आयोध्या लौटते हैं।

  • पांडव लौटे थे अपने राज्य

महाभारत की कहानी तो आप जानते ही होंगे। शकुनी मामा की चाल में फंसकर पांडवों ने अपना सबकुछ गंवा दिया था। उन्हें 13 साल के अज्ञातवास की सजा मिली थी। कार्तिक की अमावस्या वाले दिन ही पांडव (अर्जुन, भीम, नकुल, सहदेव और युधिष्ठिर) अपने राज्य वापस लौटे थे। उनके लौटने की खुशी में वहां की प्रजा ने दीये जलाकर खुशियां मनाई थी। इसलिए भी दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है।

  • समुद्र मंथन से निकली थीं मां लक्ष्मी

दीपावली कार्तिक महीने की अमावस्या को मनाई जाती है। इसी दिन समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी ने अवतार लिया था। मां लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी माना जाता है। इसी वजह से दिवाली वाले दिन हम लोग लक्ष्मी जी की पूजा करते हैं, और वरदान में खूब सारा धन और वैभव मांगते हैं। बता दें, लक्ष्मी के समुद्र मंथन में निकलने से दो दिन पहले सोने का कलश लेकर भगवान धनवंतरी भी अवतरित हुए थे, इसी वजह से दिवाली के दो दिन पहले धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है। 

  • श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का किया था वध​

दीपावली इसलिए भी मनाई जाती है क्योंकि आज के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर राक्षस का संहार किया था। नरकासुर प्रागज्योतिषपुर का राजा था, जो अब दक्षिण नेपाल का एक प्रान्त है। नरकासुर बहुत क्रूर राजा था, उसने देवमाता अदिति की कन्याओं को बंधित बनाकर रखा था। देवमाता अदिति श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा की संबंधी थीं। भगवान श्रीकृष्ण ने सभी कन्याओं को नरकासुर के चंगुल से छुड़ाया और नरकासुर का वध कर दिया था। दिवाली के अगले दिन इसी वजह से कहीं-कहीं नरक चतुर्दशी मनाई जाती है, इस दिन को लोग शुभ नहीं मानते हैं और कोई भी शुभ कार्य नहीं करते हैं।

  • राजा विक्रमादित्य के राज्याभिषेक की खुशी में 

राजा विक्रमादित्य प्राचीन भारत के एक महान राजा थे। उनकी उदारता और साहस के किस्से दूर-दूर तक फैले हुए थे।  राजा विक्रमादित्य मुगलों को धूल चटाने वाले भारत के अंतिम हिंदू सम्राट थे। कार्तिक की अमावस्या को उनका राज्याभिषेक हुआ था। इसलिए भी दिवाली मनाई जाती है।

  • सिक्खों के 6वें गुरु को आजादी मिली थी

मुगल बादशाह जहांगीर ने सिखों के 52 राजाओं को ग्वालियर के किले में बंदी बना लिया था। हालांकि गुरु को कैद करने के बाद वो परेशान रहने लगा। सपने में उसे एक फकीर ने गुरु गोविंद सिंह को आजाद करने को कहा। सुबह उठकर जहांगीर ने गुरु समेत सभी राजाओं को आजाद कर दिया। सिख समुदाय के लोग इसलिए दिवाली का त्यौहार मनाते हैं।

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