झारखंड में शादी कैसे होती है?

झारखंड में शादी कैसे होती है?

झारखंड में सबसे कम उम्र में होती है लड़कियों की शादी

देश में लड़कियों की शादी की औसत उम्र 22.3 साल है। लड़कियों की शादी की सबसे कम औसत उम्र झारखंड राज्य में है। जानिए किस राज्य में किस उम्र में होती है लड़कियों की शादी...

अपनी शादी के निबंधन के लिए अब आपको सुदूर क्षेत्रों से चलकर निबंधक अथवा अवर निबंधन कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना होगा। अब गांव हो अथवा शहर, जन्म एवं मृत्यु का निबंधन करने वाले पदाधिकारी आपके विवाह का प्रमाणपत्र देंगे। गांवों में जहां पंचायत अथवा प्रखंड कार्यालय से यह प्रमाणपत्र निर्गत किया जा सकेगा, वहीं शहरी क्षेत्रों में स्थानीय शहरी निकायों को यह अधिकार होगा। चाहे आप किसी भी जाति अथवा धर्म के हों, शादी का निबंधन कराना अनिवार्य होगा।

निबंधन शादी के एक साल के अंदर कराना होगा, जिसका शुल्क महज 50 रुपये होंगे। अगर आप निर्धारित अवधि में निबंधन नहीं कराते हैं तो आपको प्रति दिवस पांच रुपये के हिसाब से विलंब शुल्क देना होगा, जो अधिकतम 100 रुपये होगा। राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने शुक्रवार से ऑनलाइन मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्विस की प्रक्रिया शुरू कर दी है। निबंधन के लिए ऑनलाइन आवेदन झारसेवा.झारखंड.जीओवी.इन के माध्यम से दिया जा सकता है।

 

झारखंड में अनिवार्य है विवाह का निबंधन

बताते चलें कि केंद्र स्तर से विवाह का निबंधन अनिवार्य किए जाने के बाद झारखंड ने पिछले ही वर्ष झारखंड अनिवार्य विवाह निबंधन नियमावली लागू किया है। इससे इतर निबंधन की प्रक्रिया को सुलभ करने के निमित्त विभाग ने एनआइसी से विशेष सॉफ्टवेयर तैयार करने की अपील की थी। अब एनआइसी द्वारा सॉफ्टवेयर उपलब्ध करा दिए जाने के बाद निबंधन से सारी कार्रवाई ऑनलाइन होगी। निबंधक डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से प्रमाणपत्र जारी करेंगे।

 

क्या होगी निबंधन की प्रक्रिया

विवाह निबंधन के लिए ई-निबंधन पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन देना होगा। इसके साथ पक्षकारों का नाम, फोटो, आयु, निवास स्थान, व्यवसाय, विवाह की तिथि, विवाह का स्थान, मोबाइल संख्या आदि की भी जानकारी देनी होगी। ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों के आवेदन स्थानीय मुखिया, सरपंच, किसी राजपत्रित पदाधिकारी अथवा सक्षम प्राधिकार से प्रमाणित कराने होंगे।

शहरी क्षेत्रों में यह कार्य वार्ड पार्षद, राजपत्रित पदाधिकारी अथवा अन्य सक्षम प्राधिकार के माध्यम से हो सकेगा। आवेदन के साथ वर-वधू के विवाह की तस्वीर, पंडित, काजी द्वारा निर्गत प्रमाणपत्र भी प्रमाण के तौर पर अपलोड करने होंगे। अगर आवेदन में किसी तरह की त्रुटि रह गई हो तो 15 दिनों के अंदर आवेदन देना होगा।

विवाह निबंधन के लाभ

विवाह का निबंधन कराए जाने के कई लाभ होंगे। एक तो इससे बाल विवाह पर प्रहार हो सकेगा। अगर लड़का 21 और लड़की 18 की नहीं हुई तो उसका निबंधन नहीं हो सकेगा। अगर शादीशुदा जोड़े को विदेश जाना पड़े तो उसे निबंधन प्रमाणपत्र के लिए अलग से माथापच्ची नहीं करनी होगी। अगर किसी कारणवश किसी व्यक्ति के पति अथवा पत्नी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हो सकेगी।

झारखंड में सबसे कम उम्र में होती है लड़कियों की शादी

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झारखंड में विवाह निबंधन कराना हुआ अनिवार्य

झारखंड में विवाह निबंधन कराना हुआ अनिवार्य

झारखंड में रहने वाले सभी लोगों के लिए शादी का निबंधन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। झारखंड अनिवार्य विवाह निबंधन अधिनियम को राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद राजस्व, निबंधन व भूमि सुधार विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है।

जिनकी सालों पहले ही शादी हो चुकी है या फिर होने वाली है, सभी को अनिवार्य रूप से अपनी शादी का निबंधन कराना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पंचायत सेवकों को इसकी जिम्मेदारी दी जायेगी, वहीं शहरी क्षेत्रों में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले पदाधिकारी को रजिस्ट्रार बनाया जायेगा। इन्हें विवाह निबंधक का नाम दिया जायेगा। सरकार इसे सख्ती से लागू करने के लिए महानिबंधक विवाह नियुक्त करेगी।

इसके अलावा सभी राजस्व जिला में उपायुक्त को मुख्य विवाह निबंधक बनाया जायेगा। विवाह निबंधक उन्हीं शादियों का निबंधन करा सकेंगे जो उनके क्षेत्राधिकार में हुआ होगा या फिर वर या वधू उनके क्षेत्र के होंगे।

विवाह निबंधन के लिए शर्त : लड़का की उम्र कम से कम 21 और लड़की की 18 साल होनी आवश्यक होगी। दोनों पक्षों में से किसी का पति या पत्नी जीवित न हो। दोनों में से कोई मानसिक रूप से असंतुलित न हो। दोनों के बीच कोई प्रतिबंधित संबंध न हो। झारखंड अनिवार्य विवाह निबंधन अधिनियम में आवेदकों को 50 रुपये शुल्क देने होंगे।

एक्ट में किये गये शामिल : विशेष विवाह अधिनियम, हिंदू विवाह अधिनियम, भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम, मुस्लिम पर्सनल लॉ अधिनियम(शरियत), आनंद विवाह अधिनियम, काजी अधिनियम, विदेश विवाह अधिनियम, पारसी विवाह व तलाक अधिनियम और विवाह से संबंधित अन्य पर्सनल लॉ।

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