आज ये आपने किसी से कहाँ हैं की आपका बहुत बुरा वक़्त चल रहा हैं । इससे बुरा समय आपकी ज़िन्दगी में आज तक नहीं आया । तो समय कैसे बदले यही बताता हूँ ।

आज ये आपने किसी से कहाँ हैं की आपका बहुत बुरा वक़्त चल रहा हैं । इससे बुरा समय आपकी ज़िन्दगी में आज तक नहीं आया । तो समय कैसे बदले यही बताता हूँ ।

आज ये आपने किसी से कहाँ हैं की आपका बहुत बुरा वक़्त चल रहा हैं । इससे बुरा समय आपकी ज़िन्दगी में आज तक नहीं आया । तो समय कैसे बदले यही बताता हूँ ।

एक छोटी सी कहानी हैं । एक बार एक मूर्तिकार जंगल से जा रहा था । और ये जो मूर्तिकार तरह के लोग होते हैं, कलाकार तरह के लोग इनके दिमाग़ में हमेशा कुछ न कुछ नया करने की कोशिश होती है । मूर्तिकार ने एक पत्थर देखा सोचा की इससे कोई मूर्ति बन सकती हैं । वो वहीँ रुका थैले से सामान निकालने वाला था । पत्थर पर प्रहार करने वाला था की पत्थर से आवाज आई ।  रुको ! कृप्या मुझ पर प्रहार न करो । मुझे छोड़ दो आगे बढ़ जाओ । मूर्तिकार एक बार तो दर गया की जंगल में आवाज आ रही हैं । फिर वो थोड़ा सोचा की क्या मतलब की क्या करूं । उसने कहाँ की चलो छोड़ते हैं । दयालु किस्म का था आगे बढ़ गया । आगे बढ़ा जंगल में थोड़ा और आगे निकल गया तो उसे एक और पत्थर दिखाई दिया । उसने कहाँ ये सही लग रहा हैं । एकदम उत्तम हैं । इससे मूर्ति बनाई जा सकती हैं । मूर्तिकार ने थैले से सामान निकलना शुरू किया । पत्थर पे प्रहार करने वाला था । अबकी बार आवाज नहीं आई । मूर्तिकार ने पत्थर से मूर्ति बनाई । पर उसने सोचा की बड़ी भरी मूर्ति बनी है उसको के लिए तीन चार लोग लगेंगे तो अगली बार जब आऊंगा तो लोगो को लेकर के आऊंगा । मूर्ति को ले जाऊंगा ।

जंगल पार  कर के मूर्तिकार गाँव में पहुँचा । गाँव वालों ने कहाँ की तम्हारा ही इन्तज़ार था । मंदिर बन चूका हैं । मूर्ति की जरुरत हैं । मूर्ति की स्थापना करनी हैं । मूर्ति बना दो । मूर्तिकार ने कहाँ जरुरत क्या हैं मूर्ति बनाने की मूर्ति तो बना कर के आया हूँ । जंगल में तीन चार लोग मेरे साथ चलो मूर्ति लेकर के आते हैं। ये लोग जंगल में गए मूर्ति लेकर के आएं । गाँव में धूम - धाम से मूर्ति की स्थापना की गईं । अब गाँव वालों ने कहाँ की एक और पत्थर की जरुरत हैं। नारियल फोड़ने के लिये भी तो पत्थर चाहिए । मूर्तिकार ने कहाँ की एक और पत्थर चाहिएँ । एक  पत्थर और हैं जंगल में उसे भी मैं वैसे ही छोड़ कर के आ गया था । उसे भी लेकर के आ जातें हैं । तीन चार लोग फिर से उसने भेजे और वो पत्थर लेकर के आ गए । अब वहीँ दोनों पत्थर जो एक ही वक़्त पर जंगल में थे । वो एक ही वक़्त पर एक ही जगह पर आ गए । मंदिर में ! लेकिन अफ़सोश एक पत्थर की पूजा की जा रही थी । आरती की जा रही थी । दूसरे पत्थर पर नारियल फोड़े जा रहें थे । जिस पर नारियल फोड़े जा रहें थे उस पत्थर ने जिसकी पूजा की जा रही थी वो जो मूर्ति बन चूका था उस पत्थर से पूछा - तम्हारे तो बड़े मज़े चल रहें हैं । पूजा वुज़ा की जा रही हैं । आरती हो रहीं हैं । टिकें लग रहें हैं । मज़ा आ रहा होगा । उस पत्थर ने दूसरे पत्थर से जो नारियल फ़ोड़ा जा रहा था उससे कहाँ की अगर तुमने भी उस दिन अगर पहला प्रहार सह लिया होता तो आज़ तम्हारी भी पूजा की जा रही होती ।

ज़िन्दगी संघर्ष बस यही हैं । संघर्ष का दौर हैं । चला जाएगा । आप इससे बहार निकल आएँगे, बहुत जल्दी । ज़िन्दगी के दबाव में आना बंद किजिए । मुश्कुरातें रहिए । आप वो कर दिखाएँगे  जो दुनिया करना चाहेंगी  

Massage (संदेश) : आशा है की "आज ये आपने किसी से कहाँ हैं की आपका बहुत बुरा वक़्त चल रहा हैं । इससे बुरा समय आपकी ज़िन्दगी में आज तक नहीं आया । तो समय कैसे बदले यही बताता हूँ ।" आपको पसंद आयी होगी। कृपया अपने बहुमूल्य सुझाव देकर हमें यह बताने का कष्ट करें कि Motivational Thoughts को और भी ज्यादा बेहतर कैसे बनाया जा सकता है? आपके सुझाव इस वेबसाईट को और भी अधिक उद्देश्यपूर्ण और सफल बनाने में सहायक होंगे। आप अपने सुझाव निचे कमेंट या हमें मेल कर सकते है!
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