शतरंज खेलने के नियम I Rules of playing chess

शतरंज खेलने के नियम I Rules of playing chess

शतरंज खेलने के नियम, 

शतरंज जिसे चेस भी कहते है, एक बहुत पुराना खेल है. चेसबोर्ड में 2 लोगों के द्वारा इस खेल को खेला जाता है, जिसे समझने के लिए अभ्यास की जरूरत होती है. चेस एक दिमाग वाला खेल है, जिसके खेलने से मानसिक व्यायाम होता है. मनुष्य के जीवन में खेल का बहुत अधिक महत्व है, ये हमारे जीवन में मनोरंजन का साधन होते है. मनोरंजन की आवश्कता हर उम्र के इन्सान को होती है, इससे शारीरिक कसरत के साथ मन का तनाव भी कम होता है. मनोरंजन के कई साधन है,

चेस खेलने के लिए कितने लोगों की आवश्यकता होती है ? इसमें सिर्फ 2 लोगों की आवश्यकता है.
चेस कौनसा गेम है इनडोर या आउटडोर ? यह एक इनडोर गेम है.
इसे खेलने के लिए कोई उम्र तय की गई है ? इसे किसी भी उम्र के लोग खेल सकते हैं, लेकिन कुछ टूर्नामेंट्स में उम्र की बाध्यता होती है.
चेसबोर्ड में कितने खाने होते हैं ? 40 खाने होते हैं.
चेस में कितनी गीटियां होती है ? 32 गीटी होती है जिनमे 16 के अनुपात में बांटा जाता है.
शतरंज की गीटियों के नाम ? 8 प्यादे, 2 घोड़ा, 2 हाथी, 2 ऊंट, 1 रानी एंव 1 राजा.
वर्गों की पहचान कैसे होती है ? शतरंज में मौजूद वर्ग काले और सफ़ेद कलर के होते हैं.
विश्व शतरंज चैंम्पियनशिप की शुरुआत कब हुई ? 1886 में हुई थी.
भारत का सर्वश्रेष्ट शंतरज ख़िलाड़ी का नाम विश्वनाथन आनंद
शंतरज टूर्नामेंट कितने समय का होता है ? यह एक मिनट से छ: घंटे तक हो सकता है.
विश्व शतरंज दिवस कब मनाया जाता है ? 20 जुलाई को
भारत के 66वें शतरंज ग्रैंडमास्टर कौन बने ? जी आकाश

 

शतरंज का खेल पर निबंध 

चेस एक इंडोर गेम है, जिसकी कोई उम्र सीमा नहीं होती है, लेकिन इसे एक समझदार व्यक्ति ही खेल सकता है. चेस खेलने की कोई उम्र सीमा नहीं होती है, इसलिए इसे बड़े लोग महिला, पुरुष सभी खेलना पसंद करते है. चेस बहुत ही रोचक खेल है, जिसमें खेलने वाले के साथ साथ देखने वालों को भी बहुत मजा आता है.

चेस का इतिहास

वैसे चेस खेल का इतिहास अच्छे से कही भी नहीं लिखा हुआ, लेकिन कहते है आज से लगभग 2000 साल पहले चेस के जैसा खेल लोग खेला करते थे. 280-550 में जब गुप्त साम्राज्य था, तब इस तरह के खेल की शुरुवात हुई थी. इसके बाद 1200 दशक के आसपास साउथ यूरोप में शतरंज के खेल की शुरुवात हुई, जिसमें 1475 के आस पास इस खेल में बड़े बदलाव किये गए, जिसे आज हम खेलते है. इस खेल को बदलाव के साथ स्पेन एवं इटली में अपनाया गया.

शतरंज खेल का लक्ष्य

शतरंज खेल दो लोग एक दुसरे के विरोध में खेलते है. चेसबोर्ड में 64 खाने होते है, जो सफ़ेद, काले रंग के होता है. टोटल 32 गोटी (पीस) से ये गेम खेलते है, जिसमें हर एक खिलाड़ी के पास 16 पीस होते है. इसमें 16 सफ़ेद व् 16 काली गोटी होती है. हर एक टीम के पास 1 राजा, 1 रानी, 2 हाथी, 2 घोड़े, 2 ऊँठ एवं 8 प्यादे होते है. इस खेल का यही लक्ष्य होता है कि किस तरह सामने वाले खिलाड़ी को शह और मात (चेकमेट) दिया जा सके. शह और मात की स्थिती तब होती है, जब कोई राजा की जगह पर कब्ज़ा कर ले, और उस कब्जे से उसे कोई निकाल न सके.

शतरंज खेल की शुरुवात और उसके नियम 

खेल की शुरुवात में सभी गोटियों को चेसबोर्ड में जमाया जाता है. इन गोटियों की सेटिंग हर बार खेल में एक जैसी ही होती है, इसमें कोई फेरबदल नहीं होता है. एक खिलाड़ी सफ़ेद गोटी लेता है, दूसरा काली. चेसबोर्ड ज़माने के लिए हाथियों को दोनों कोने में रखते है, फिर उसके बाजु वाले दोनों कोने में घोड़े रखते है, फिर उसके बाजु में दोनों साइड ऊँठ रखते है. फिर लेफ्ट साइड राजा और राईट साइड रानी रखते है. इनके सामने की लाइन में 8 प्यादे रखते है. जो भी सफ़ेद गोटी लेता है, वो पहले चलता है.

प्यादा प्यादा प्यादा प्यादा प्यादा प्यादा प्यादा प्यादा
हाथी घोड़ा ऊँठ राजा रानी ऊँठ घोड़ा हाथी

गोटियाँ कैसी चली जाती है

चेस में हर एक गोटी के चलने का अपना तरीका होता है, एक निश्चित स्थान एक निश्चित चाल पर ही ये चलते है.  इसमें कोई भी गोटी किसी दूसरी गोटी के उपर से नहीं चली जा सकती है, अगर वो सामने वाले की है तो उसे मार दिया जाता है, लेकिन अगर ये खुद की है तो उसके उपर से गोटी नहीं चली जा सकती है.

  1. राजा –राजा इस खेल का मुख्य होता है, जिसे बचाने के लिए ही ये गेम खेला जाता है. लेकिन मुख्य होने के बावजूद ये सबसे कमजोर होता है. राजा सिर्फ एक कदम, किसी भी दिशा में उपर, नीचे, आजू बाजु या तिरछे चल सकता है.
  2. रानी –रानी जिसे वजीर भी कहते है, खेल में बहुत ताकतवर होता है. ये किसी भी दिशा में, तिरछा, सीधा, आगे, पीछे कितने भी वर्ग चल सकता है.
  3. हाथी –हाथी अपनी इच्छा अनुसार कितने भी वर्ग चल सकता है, लेकिन ये सिर्फ खड़ा या आड़ा चल सकता है, ये तिरछा नहीं चल सकता है. हाथी भी ताकतवर होता है, ये एक खिलाड़ी के पास 2 होते है. ये दोनों मिलकर काम करते है, और एक दुसरे की रक्षा करते है.
  4. ऊँठ –ऊँठ भी अपनी इच्छा अनुसार कितने भी वर्ग चल सकता है, लेकिन सिर्फ तिरछा ही चलता है. दोनों ऊँठ मिलकर काम करते है, और अपनी कमजोरी ढक लेते है.
  5. घोड़ा –घोड़ा ही चाल बाकियों से बहुत ही अलग होती है. ये किसी एक दिशा में ढाई घर चलता है. जैसे L आकार होता है, वैसा ही चाल चलता है. घोड़ा एक अकेला ऐसा पीस है जो किसी अन्य पीस के उपर से चाल चल सकता है.
  6. प्यादा –प्यादा एक सैनिक की तरह कार्य करते है. ये एक कदम आगे चलते है, लेकिन किसी अन्य गोटी को तिरछा होकर मारते है. प्यादा एक समय में एक ही वर्ग चलता है, सिर्फ पहली चाल में ये 2 वर्ग चल सकता है. ये पीछे नहीं चल सकता है, न ही मार सकता है. अगर प्यादे के सामने कोई आ जाये तो ये पीछे नहीं हट सकता है, न ही सामने वाले को सीधे मार सकता है.

शतरंज खेल के स्पेशल रूल 

  • कैसलिंग  यह एक स्पेशल रूल है. इसमें 2 चीज आप एक साथ कर सकते है, एक राजा को बचा सकते है, साथ ही हाथी को कार्नर से हटा कर बीच खेल में ला सकते है. इसमें खिलाड़ी अपने राजा को एक वर्ग की जगह 2 वर्ग चला सकता है, साथ ही हाथी को राजा के बाजु में रख सकते है. कैसलिंग के लिए ये बातें होना जरुरी है –
  • कैसलिंग राजा द्वारा एक ही बार कर सकते है.
  • राजा की ये पहली चाल होनी चाहिए.
  • हाथी की ये पहली चाल होनी चाहिए.
  • राजा और हाथी के बीच को भी गोटी नहीं होनी चहिये.
  • राजा के उपर शह या मात नहीं होना चाहिए.
  • शह और मात  जब राजा पर सब तरफ से शह हो जाती है, और राजा उससे नहीं बच पाता है, उसे शह और मात कहते है. शह और मात से निकलने के तरीके –
  • उस जगह से राजा हट जाये
  • चेक के बीच में दूसरी गोटी ले आयें
  • उस गोटी को मार दें

अगर राजा शह और मात से नहीं बच पाता तो वहीँ गेम ख़त्म हो जाता है.

  • टाई (ड्रा) – अगर खेल में कोई विजेता नहीं निकल पाता है, तो उस स्थिती में खेल ड्रा हो जाता है. डॉ होने के पांच कारण हो सकते है –
  • दोनों खिलाड़ी राजी हो जाएँ और खेल बंद कर दें
  • अगर बोर्ड में शह और मात के लिए गोटी ही न बची हो
  • कोई खिलाड़ी उस स्थिती में ड्रा बोल सकता है, जब लगातार तीन बार एक सी स्थिती बन जाती है.
  • अगर कोई खिलाड़ी चल चलता है, लेकिन उसके राजा को शह और मात नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उसके पास कोई और चाल चलने के लिए जगह नहीं है.

शतरंज में कैसे जीते?

शतरंज के खेल को जीतने के लिए आपको छह चीजों की आवश्यकता होगी:

  1. अच्छा उद्घाटन चलें शतरंज में अपनी पहली चाल का लक्ष्य बोर्ड पर नियंत्रण स्थापित करना है। ...

  2. नि: शुल्क के लिए मोहरे दूर मत दो ...

  3. स्थिति में अपने टुकड़े जाओ ...

  4. राजा पर हमला करना समन्वय करना ...

  5. अपने खुद के राजा की सुरक्षा को देखें ...

  6. हमेशा अच्छा खेल बनें

चैस गेम कैसे खेलते है?

अपनी-अपनी साइड से दूसरी लाइन पे सबको रख लो। - जो खिलाड़ी पहले दूसरी साइड की आखिरी लाइन में एक भी प्यादा लेकर पहुंच जाएगा यानी रानी बना लेगा, वह जीत जाएगा। - चेस में सफेद मोहरों वाला खिलाड़ी पहली चाल चलता है। 'पॉन मैच' में भी।

शतरंज के खेल में सर्वाधिक शक्तिशाली मोहरा कौन सा है?

वैसे मंत्री या वजीर सबसे शक्तिशाली मोहरा होता है, क्योंकि यह आगे-पीछे, आरे-तिरछे, अगल-बगल अपनी मर्जी एवं सुविधा से, कई घरों तक आ-जा सकता है।

शतरंज में कितनी गोटिया होती है?

शतरंज एक चौपाट (बोर्ड) के ऊपर दो व्यक्तियों के लिये बना खेल है। चौपाट के ऊपर कुल ६४ खाने या वर्ग होते है, जिसमें ३२ चौरस काले या अन्य रंग ओर ३२ चौरस सफेद या अन्य रंग के होते है। खेलने वाले दोनों खिलाड़ी भी सामान्यतः काला और सफेद कहलाते हैं।

शतरंज को हिंदी में क्या कहते हैं?

शतरंज Meaning in Hindi - शतरंज का मतलब हिंदी में
चौंसठ खानों की बिसात वाला खेल। ... पुल्लिंग [फारसी शब्द - मि० संज्ञा शब्द - चतुरंग] एक प्रकार का प्रसिद्ध खेल जो चौसठ खानों की बिसात पर ३२ गोटियों से खेला जाता है। विशेष-सब मोहरें दो रंगों के होते है।

शतरंज खेल का जन्मदाता कौन सा देश है?

किसी अज्ञात बुद्धि-शिरोमणि ने पाँचवीं-छठी सदी में यह खेल संसार के बुद्धिजीवियों को भेंट में दिया। समझा जाता है कि यह खेल मूलतः भारत का आविष्कार है, जिसका प्राचीन नाम था- 'चतुरंग'; जो भारत से अरब होते हुए यूरोप गया और फिर १५/१६वीं सदी में तो पूरे संसार में लोकप्रिय और प्रसिद्ध हो गया।

भारत के प्रथम ग्रैंड मास्टर कौन है?

विश्व के लोकप्रिय शतरंज खिलाड़ी श्री विश्वनाथन आनंद भारत में पहले ग्रैंडमास्टर थे.

शतरंज में पहली भारतीय महिला ग्रैंडमास्टर कौन है?

2000: एस विजयलक्ष्मी शतरंज की पहली महिला ग्रैंडमास्टर बनी.

शतरंज में प्रथम विश्व चैंपियन भारतीय कौन है?

विश्वनाथन आनंद के विश्व के सर्वोच्च खिलाड़ियों में से एक के रूप में उदय होने के बाद भारत ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी उपलब्धियां हासिल की। 1987 में विश्व जूनियर स्पर्धा जीतकर वह शतरंज के पहले भारतीय विश्व विजेता बने।

विश्व रैपिड शतरंज प्रतियोगिता जीतने वाली प्रथम महिला कौन है?

भारत की पहली महिला वर्ल्ड रैपिड चैंपियन बनीं शतरंज खिलाड़ी कोनेरू हंपी

वर्तमान में विश्व शतरंज चैंपियन कौन है?

माना जाता है कि आधिकारिक विश्व चैम्पियनशिप आम तौर पर 1886 में शुरू कि गयी थी जब यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में दो प्रमुख खिलाङी, जोहान ज़ुकेर्तोर्त और विल्हेम स्टेनिज एक मैच खेले थे। मौजूदा विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन तत्कालीन चैंपियन विश्वनाथन आनंद को हराने के बाद खिताब जीता है।

 

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