कब्बड्डी क्या है और उसके नियम क्या है? What is Kabbaddi and What its Rules

कब्बड्डी क्या है और उसके नियम क्या है? What is Kabbaddi and What its Rules

कब्बड्डी क्या है और उसके नियम क्या है?

कबड्डी एक ऐसा खेल है, जिसमे कई खेलें मिश्रित हैं. इसमें रेसलिंग, रग्बी आदि खेलों का मिश्रण देखने मिलता है. इसका मुकाबला दो दलों के बीच होता. ये जहाँ एक तरफ बहुत ही ज़बरदस्त खेल है वहीँ दूसरी तरफ़ कई कसरतों का मेल भी है. समय के साथ इस खेल का बहुत विकास हुआ है. आज ये ज़िला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेला जा रहा है. बहुत बड़े पैमाने पर खेले जाने की वजह से कई नौजवान कबड्डी में दिलचस्पी  भी लेने लगे हैं, और अपने क्षेत्र के कबड्डी क्लब से जुड़कर कबड्डी के ज़रिये अपना भविष्य और अपनी पहचान बनाने की कोशिश में लगे है. इस खेल को विभिन्न जगहों में विभिन्न नाम से जाना जाता है. जैसे तमिलनाडु में कबड्डी को चादूकट्टू, बंगलादेश में हद्दू, मालद्वीप में भवतिक, पंजाब में कुड्डी, पूर्वी भारत में हू तू तू, आंध्र प्रदेश में चेडूगुडू के नाम से जाना जाता है. कबड्डी शब्द मूलतः एक तमिल शब्द ‘काई- पीडी’ शब्द से बना है जिसका मतलब है हाथ थामे रहना, तमिल शब्द से निकलने वाला शब्द कबड्डी उत्तर भारत में बहुत मशहूर है.

कब्बड्डी क्या है?

कबड्डी एक खेल है, जो मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप में खेली जाती है। कबड्डी नाम का प्रयोग प्राय: उत्तर भारत में किया जाता है, इस खेल को दक्षिण में चेडुगुडु और पूर्व में हु तू तू के नाम से भी जानते हैं। यह खेल भारत के पड़ोसी देश नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान में भी उतना ही लोकप्रिय है। तमिल, कन्नड़ और मलयालम में ये मूल शब्द, (கை-பிடி) "कै" (हाथ), "पिडि" (पकडना) का रूपांतरण है, जिसका अनुवाद है 'हाथ पकडे रहना'। कबड्डी, बांग्लादेश का राष्ट्रीय खेल है।

कबड्डी खेल का इतिहास क्या है? (Kabaddi game history)

स्फूर्ति के इस दमखम खेल का जन्म कब हुआ, इसे पहली बार कब व कहाँ खेला गया. इस सम्बन्ध में कोई पुष्ट जानकारी नही है. कहा जाता है कि महाभारत काल में कबड्डी का जन्म भारत में ही हुआ. अभिमन्यु व कौरवों के बिच संग्राम के दौरान इसकी झलक मिलती है. मगर सभी लोग इस पर एकमत नही है. दूसरी तरफ ईरान इस खेल को अपने देश से जोड़ता है. यह सच है कि कबड्डी जितना लोकप्रिय भारत में है, अन्य किसी देश में नही है, चाहे वो ईरान हो या अन्य एशियाई देश.

देश के ग्रामीण जनमानस की रग रग में इस खेल का जूनून ही इस बात का सबूत है, कि यह भारतीय खेल था.कबड्डी का वर्तमान स्वरूप 1920 के दशक में महाराष्ट्र से शुरू हुआ, इसी समय इस खेल के नए नियम बनाए गये. तथा पेशेवर खेल के रूप में कबड्डी को भी शामिल किया जाने लगा. 1936 के बर्लिन ओलम्पिक में पहली बार कबड्डी को शामिल किये जाने के बाद विश्व के लोग इससे परिचित हुए. भारत में 1938 में इसे राष्ट्रीय खेलों में सम्मिलित किया गया. आजादी के बाद 1950 में अखिल भारतीय कबड्डी संघ (आल इंडिया कबड्डी फेडरेशन) बनाया गया.

 1971 में पाकिस्तान से स्वतंत्र हुए बांग्लादेश ने कबड्डी को अपने राष्ट्रीय खेल के रूप में मान्यता दी. 1980 में इसकी पहली एशियन कबड्डी प्रतियोगिता शुरू हुई. भारत में खेले गये एशियन गेम्स 1982 एवं इसके बाद बीजिंग एशियन गेम्स में भी कबड्डी को शामिल किया गया था.

कबड्डी खेल की मुख्य विशेषता (Kabaddi game features)

ये खेल दो दलों के बीच होता है. इसमें एक दल आक्रामक और दूसरा दल परिरक्षक के रूप में होता है. आक्रामक दल से एक एक करके खिलाड़ी परिरक्षक के क्षेत्र में परिरक्षकों को हराने के लिए आते हैं. परिरक्षकों द्वारा इस एक के बाद एक आते हुए परिरक्षकों को पकड़ना होता है. इस खेल का विस्तृत वर्णन नीचे दिया गया है –

कबड्डी खेल के नियम Rules Of Game In Kabaddi

  1. प्रत्येक टीम में 12 खिलाड़ी होते है,लेकिन एक समय में केवल सात खिलाड़ी मैदान में खेलते है|  शेष पाँच खिलाड़ी सुरक्षित होते है, जिन्हे विशेष परिस्थिथियों में प्रयोग किया जाता है|
  2. मैच के लिए 20-20 मिनट की दो अवधि का प्रयोग किया जाता है एव बीच में 5 मिनट का विश्राम दिया जाता है| 20 मिनट के बाद दोनों टीमे अपना खेल क्षेत्र बदल देती है| महिलाओ के लिए 15-15 मिनट की दो अवधि का प्रयोग किया जाता है| विश्राम वही 5 मिनट का होता है|
  3. खेल के दौरान मैदान से बाहर जाने वाला खिलाड़ी आउट माना जाता है|
  4. संघर्ष आरंभ होने पर लॉबी का क्षेत्र भी मैदान का हिस्सा माना जाता है|
  5. बचाव करने वाली टीम के खिलाड़ी का पैर पीछे वाली रेखा से बाहर निकाल जाने पर वह आउट मान लिया जाता है|
  6. रेड करने वाला खिलाड़ी लगातार कबड्डी-कबड्डी शब्द का उच्चारण करता रहता है|
  7. एम्पायर द्वारा रेडर को किसी नियम के उल्लघन पर सचेत करने के बाद भी यदि वह फिर भी नियम का उल्लंघन करता है,तो उसकी बारी समाप्त कर दी जाती है तथा विपक्ष को एक अंक दे दिया जाता है, किन्तु रेडर को आउट नहीं दिया जाता|
  8. जब तक एक रेडर विपक्षी टीम के क्षेत्र में रहता है,तब तक विपक्षी टीम का कोई भी खिलाड़ी रेडर की टीम में रेड करने नहीं जा सकता|
  9. रेडर द्वारा विपक्ष के क्षेत्र में सांस तोड़ने पर उसे आउट माना जाता है|
 10. यदि एक से अधिक रेडर विपक्ष के क्षेत्र में चले जाते है, तो एम्पायर उन्हे वापस भेज देता है व उनकी बारी समाप्त कर दी जाती है| इन रेडरों द्वारा छुए हुए खिलाड़ी आउट भी नहीं माने जाते और न ही विपक्षी खिलाड़ी इंका पीछा करते है|
 11. खेलते समय यदि किसी टीम के एक या दो खिलाड़ी शेष रह जाते है, तो कप्तान को अधिकार है कि  वह अपनी टीम के सभी सदस्यों को बुला सकता है| इसके बदले विपक्ष को उतने अंक एवं लोना के दो अंक प्रदान किए जाते है|
 12. रेडर यदि बोनस रेखा को पार कर लेता है,तो उसे एक अंक दिया जाता है|
 13. जो टीम टॉस जीतती है, वह या तो पाले का चुनाव करती है अथवा प्रथम आक्रमण| मध्यांतर के बाद पाले का आदान-प्रदान करके दूसरे पक्ष का खिलाड़ी प्रथम आक्रमण करेगा|
 14. यदि खिलद के शरीर का कोई अंग क्रीडा-क्षेत्र से बाहर कि जमीन को स्पर्श करता है, तो उस खिलाड़ी को आउट घोषित कर दिया जाता है|
 15. असभ्य अथवा उददंड व्यवहार के लिए रेफरी खिलाड़ी को चेतावनी दे सकता है, विपक्ष को अंक दे सकता है अथवा खिलाड़ी को अस्थायी अथवा स्थायी रूप से अपात्र घोषित कर सकता है| संपूर्ण टीम को भी अपात्र घोषित किया जा सकता है|
 16. स्पर्धा के समय एक रेफरी, दो एम्पायर, एक अंक लेखक तथा दो सहायक अंक लेखक का होना आवश्यक है|
  17. किसी विशेष परिस्थिति में कप्तान दो टाइम आउट ले सकता है, जिनकी अवधि 30-30 मिनट सेकंड की होती है, लेकिन इस अवधि में खिलाड़ी अपना स्थान नहीं छोड़ सकते|
  18. कोई भी रेडर अथवा विपक्षी खिलाड़ी किसी को जबरदस्ती धक्का देखकर सीमा रेखा से बाहर गिराने की चेष्टा नहीं कर सकता|
  19. किसी रेडर के बिना पारी के विपक्षी टीम में रेड करने जाने पर एम्पायर उसे वापस भेज सकता है| यदि ऐसा बार-बार होता है, तो एम्पायर उस पक्ष को एक बार चेतावनी देता है| उसके पश्चात विपक्ष को एक अंक|
  20. जब एक टीम दूसरी टीम के सभी खिलाड़ियो को आउट कर देती है, तो उसे एक लोना मिलता है| इसमे दो अंक अतिरिक्त दिए जाते है| तत्पश्चात खेल पुनः आरंभ होता है|
  21. विपक्षी टीम के खिलाड़ी उसी क्रम में जीवित किए जाते है,जिस क्रम में वे आउट होते है|
  22. एक बार बदले गए खिलाड़ी को पुनः खेल में प्रविष्ट नहीं किया जा सकता|
  23. यदि दोनों टीमों के निश्चित अवधि के अंदर अंक समान होते है, तो उस अवधि में अतिरिक्त 5-5 रेड दी जाती है|

कबड्डी की प्रमुख प्रतियोगिताएं (Kabaddi tournaments)

जैसा कि उपर जिक्र किया जा चुका है. कबड्डी एक ऐसा खेल है जो घर मोहल्ले से अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक खेला जाने वाला आधुनिक खेल है. हाल ही के वर्षों में इसकी बढ़ती लोकप्रियता के चलते कई बड़े टूर्नामेंट का आयोजन भी किया जाता है. जिनमें स्टार स्पोर्ट्स प्रो कबड्डी टूर्नामेंट तथा वर्ल्ड कबड्डी लीग के अतिरिक्त खेले जाने वाले मुख्य टूर्नामेंट ये है.

  • Asia Kabaddi Cup- ये सभी एशियाई देशों के मध्य खेली जाने वाली महाद्वीपीय प्रतियोगिता है. वैसे भी अधिकतर कबड्डी को चाहने वाले फैन्स इसी रीजन के है. पहली बार एशिया कबड्डी कप 2011 में ईरान में खेला गया, इसके अगले साल इसका आयोजन पाकिस्तान में हुआ, जिसे पाक टीम द्वारा जीता गया था. Circle style की इस प्रतियोगिता का अगला ख़िताब वर्ष 2016 में भी पाकिस्तान के द्वारा जीता गया, जिसमें भारतीय टीम दूसरे स्थान पर रही.

  • एशियाई खेल– एशियाई खेलों में भारत का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है, दो साल के अंतराल से आयोजित इस प्रतियोगिता को पहली बार कबड्डी को 1990 में बीजिंग में हुये एशियाई खेलों में शामिल किया गया था। पहले एशियाई खेल में भी भारत द्वारा स्वर्ण पदक जीता था. इसके बाद अब तक हुए 7 आयोजनों में भी भारत ने गोल्ड मैडल जीता है.
  • कबड्डी विश्वकप – इस खेल की सबसे बड़ी प्रतियोगिता है. 2010 के बाद इसका आयोजन हर वर्ष एक नये स्थान पर किया जाता है. जिसमे विश्व की बड़ी टीम हिस्सा लेती है. कबड्डी विश्वकप का पहला आयोजन 2004 में किया गया, इसके बाद ये 2007 व 2010 क्रमशः तीन वर्षों के अंतराल से खेला जाता था. कबड्डी विश्व कप 2017 का आयोजन भारत के अहमदाबाद शहर में हुआ था, जिसमें भारत ने ईरान को कड़े मुकाबले में हराते हुए खिताब अपने नाम किया था. इस टूर्नामेंट में अभी तक भारत का दबदबा कायम है.
  • महिला कबड्डी विश्व कप– यह एक महिला प्रतियोगिता है. 2012 में इसका पहला आयोजन हुआ था. इसके बाद 2014 में इसका अगला टूर्नामेंट खेला गया था. भारतीय महिला कबड्डी टीम ने इन दोनों संस्करणों को अपने नाम कर यह जता दिया था, कि वो ही कबड्डी के असली बादशाह है.
  • प्रो कबड्डी लीग – आईपीएल की बिसात पर शुरू किया गया यह कबड्डी टूर्नामेंट बेहद लोकप्रिय है. 2014 में इसका पहला आयोजन किया गया था. इसे स्टार स्पोर्ट्स प्रो टूर्नामेंट भी कहा जाता है. स्टार स्पोर्ट्स 1,2 और hd पर इसका हिंदी व अंग्रेजी में सीधा   प्रसारण होता है. विश्व स्तर पर कबड्डी की मार्केटिंग और प्रमोशन में इस खेल प्रतियोगिता का महत्वपूर्ण स्थान रहा है.

भारतीय कबड्डी के प्रकार (Types of kabaddi game)

कबड्डी खेल के चार बहुत विख्यात प्रारूप हैं, जिसे भारत में खेला जाता है. इसे भारत के अमैच्योर कबड्डी फेडरेशन द्वारा आयोजित किया जाता है.

  • संजीवनी कबड्डी – इस कबड्डी में खिलाडियों के पुनर्जीवन का नियम होता है. विरोधी दल के खिलाडी को आउट करने पर आक्रामक दल से बाहर हुए खिलाड़ियों में से एक को पुनर्जीवन मिल जाता है, और वह अपने दल की तरफ से फिर से खेलने लगता है. ये खेल भी 40 मिनट का होता है. जिसे खेलने के दौरान एक पांच मिनट का हाफ टाइम मिलता है. दो दलों में सात सात खिलाड़ी मौजूद होते है, और जो दल अपने विरोधी के सभी खिलाडियों को आउट कर देता है, उसे बोनस के तौर पर अतिरिक्त चार पॉइंट मिलते हैं.
  • जेमिनी स्टाइल – कबड्डी के इस प्रारूप में भी दोनों दलों में सात सात खिलाड़ी मौजूद होते हैं. खेल के इस प्रारूप में खिलाडियों को पुनर्जीवन नहीं मिलता, यानि किसी दल का एक खिलाड़ी यदि खेल के दौरान मैदान से आउट होकर बाहर जाता है, तो वह तब तक बाहर रहता है जब तक खेल समाप्त न हो जाए. इस तरह जो दल अपने विरोधी दल के सभी खिलाड़ियों को मैदान से बाहर करने में सफ़ल हो जाता है, तो उस दल को एक पॉइंट मिलता है. इस तरह से ये खेल पाँच या सात पॉइंट तक चलता है, यानि पूरे खेल में पांच या सात मैच खेले जाते हैं. इस तरह के मैच के दौरान समय तय नहीं रहता.
  • अमर स्टाइल – अमैच्योर कबड्डी फेडरेशन द्वारा आयोजित खेल का यह तीसरा प्रारूप है. ये प्रारूप अक्सर संजीवनी प्रारूप की ही तरह होता है, जिसमें समयावधि तय नहीं होती. इस तरह के खेल में आउट होने खिलाड़ी को मैदान से बाहर नहीं जाना पड़ता है. आउट होने वाला खिलाड़ी मैदान में रह कर आगे का खेल खेलता है. आउट करने के एवज में आक्रामक दल के खिलाड़ी को पॉइंट की प्राप्ति होती है.
  • पंजाबी कबड्डी – यह इस खेल का चौथा रूप है. इसे एक वृत्तिय परिसीमा के अन्दर खेला जाता है. इस वृत्त का व्यास 72 फिट का होता है. इस कबड्डी की भी तीन शाखाएं हैं, जिनके नाम लम्बी कबड्डी, सौंची कबड्डी और गूंगी कबड्डी है.

कबड्डी के अर्जुन पुरस्कार विजेता और वर्ष Kabaddi’s Arjuna Award winner and year

                                                    कबड्डी के अर्जुन पुरस्कार विजेता और वर्ष 
                  नाम      वर्ष
          सदानंद महादेव शेट्टी      1972
          भोलानाथ गुईन      1973
          एस.पी. खटावकर      1978
          शांताराम जाधव      1980
          मोनिका नाथ      1981
          माया काशीनाथ      1983
          रमा सरकार      1986
         हरदीप सिंह      1990
         एस.राजरत्नम्      1994
         अशोक डी.शिंदे      1994
         पी.गणेशन      1995
         राम अवतार      1996
         नीता मोरेश्वर दादवे      1996
         रणधीर सिंह      1997
         अशन कुमार      1998
         विश्वजीत पालित      1998
         बलविंदर सिंह      1999
         तीरथराज      1999
         सी.होनप्पा      2000
         बी.सी.रमेश      2001
         राममेहर सिंह      2002
         संजीव कुमार      2003
         सुंदर सिंह      2004
         रमेश कुमार      2005
         नवीन गोतम      2006
         पंकज नवनात श्री सत      2008
         दिनेश कुमार      2010
         तेजस्वनी बाई      2011
          राकेश कुमार      2011
          अनूप कुमार      2012
          ममता पुजारी      2014
          मंजीत चिल्लर      2015
          अभिलाषा महात्रे      2015

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